साई व्हाइब्रियोनिक्स पत्रिका

" जब आप किसी हतोत्साहित, निराष या रोग ग्रस्त व्यक्ति को देखते हो, वहीं आपका सेवा क्षेत्र है " Sri Sathya Sai Baba
Hands Reaching Out

Vol 17 अंक 4
जुलाई/अगस्त 2026
सिंहावलोकन

डॉ. जीत के अग्रवाल की कलम से

पावन गुरु पूर्णिमा के निकट आने के अवसर पर डॉ. अग्रवाल बताते हैं कि यह समय अपने सद्गुरु की शिक्षाओं को दैनिक जीवन में उतारने के लिए आत्मचिंतन, कृतज्ञता और नवसंकल्प का उपयुक्त अवसर है। वे इस बात पर भी प्रकाश डालते हैं कि रोगियों के साथ किस प्रकार व्यवहार करें, वाइब्रिऑनिक्स की निरंतर प्रगति सुनिश्चित करें, प्रैक्टिशनरों के समुदाय को मजबूत करें तथा एसोसिएटशिप का वार्षिक नवीनीकरण समय पर करें।

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रोगी तथा रोग का विवरण

इस अंक में 12 रोचक केस हिस्ट्रीज़ साझा की गई हैं, जिनमें शामिल हैं: कमर दर्द और चक्कर, अवसाद, पैर के अंगूठे के नाखून की चोट, दुर्घटना के बाद का दर्द, घुटने का दर्द, नाक से खून आना, सिरदर्द, पैनिक अटैक, जीभ पर सफेद धब्बे, अनिद्रा और माइग्रेन, नींद न आना, त्वचा की एलर्जी तथा एक कुत्ते के कान के अंदर गाँठ।

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चिकित्सक की रुपरेखा

एक प्रैक्टिशनर की 2024 में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वाइब्रिऑनिक्स की ओर और उनके साथ उनकी रोचक यात्रा के बारे में पढ़ें।

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प्रश्नोत्तर कॉर्नर

इस अंक में निम्न विषयों के बारे में उपयोगी जानकारी दी गई है: पौधों, पशुओं, शिशुओं, गर्भवती महिलाओं और वृद्धजनों का उपचार करते समय अतिरिक्त सावधानियाँ।चूँकि हम सामान्यतः स्वयं रोगी के वाइटल्स नहीं मापते, इसलिए जब रोगी अपना वजन, हृदय गति, तापमान और रक्तचाप जाँचने की अपेक्षा करे, तब कैसे व्यवहार करें। अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान क्या 108CC बॉक्स को एल्युमिनियम फॉयल में लपेटना चाहिए? मानसिक और भावनात्मक समस्याओं में क्या अंतर है? यदि रोगी उपचार और जीवनशैली संबंधी सभी प्रोटोकॉल का पालन कर रहा हो, फिर भी ठीक न हो रहा हो, तो आंतरिक और बाहरी बाधाएँ तथा उपचार में रुकावट डालने वाले कारण क्या हो सकते हैं? बेहतर सेवा प्रदान करने में प्रैक्टिशनर की भूमिका क्या होनी चाहिए?

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दिव्य चिकित्सक के दिव्य वचन

स्वामी प्रेमपूर्वक हमारा मार्गदर्शन करते हैं कि वास्तव में “भोजन” और “सात्त्विक भोजन” किसे कहा जाता है, उसकी गुणवत्ता किन बातों पर निर्भर करती है और सेवा गतिविधियों में संलग्न रहते समय हमें किन पाँच महत्वपूर्ण तत्वों के आधार पर जीवन जीना चाहिए।

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घोषणाएँ

यूके, लंदन, पुट्टपर्थी तथा दिल्ली, भारत में होने वाली आगामी वर्कशॉप्स की जानकारी।

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इसके अतिरिक्त

• स्वास्थ्य लेख: “अपने गुर्दों का ध्यान रखें” — इस लेख में अद्भुत गुर्दों की प्रणाली, संरचना और अत्यंत जटिल कार्यप्रणाली, उनके स्वास्थ्य का आकलन करने के विभिन्न मानदंड, गुर्दों के विकार एवं रोग, गुर्दों की विफलता में उपलब्ध उपचार विकल्प, एक गुर्दे के साथ जीवन तथा गुर्दों को स्वस्थ रखने के लिए उपयोगी सुझावों को समाहित किया गया है। • वर्कशॉप्स एवं सेमिनारों का संक्षिप्त विवरण: पुणे, महाराष्ट्र; वेस्ट लंदन, यूके में आयोजित कार्यक्रमों तथा प्रथम वार्षिक वर्चुअल ग्लोबल रिफ्रेशर सेमिनार और पुणे में आयोजित एक विशेष कैंप की जानकारी एवं चित्र। • उपाख्यान : डॉ. जीत के. अग्रवाल की डायरी से “सूटकेस में पादुकाएँ: सीमा पर मौन प्रहरी” — एक रोचक एवं प्रेरणादायक अनुभव। • श्रद्धॉंजलि (In Memoriam): क्रोएशिया की एक महान प्रैक्टिशनर, जो 1997 से वाइब्रिऑनिक्स की सेवा कर रही थीं, को श्रद्धापूर्वक नमन।

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