साई व्हाइब्रियोनिक्स पत्रिका

" जब आप किसी हतोत्साहित, निराष या रोग ग्रस्त व्यक्ति को देखते हो, वहीं आपका सेवा क्षेत्र है " Sri Sathya Sai Baba
Hands Reaching Out

इसके अतिरिक्त

Vol 17 अंक 4
जुलाई/अगस्त 2026


1. स्वास्थ्य लेख

अपनी किडनी का ध्यान रखें!

 “मानव शरीर शाश्वत नहीं है। इसमें ऐसा मांस है जो सड़ सकता है और दुर्गंधयुक्त मल-मूत्र भी है। फिर भी इसी शरीर में पवित्र भावनाएँ विद्यमान हैं। इसी छिपे हुए खजाने की रक्षा के लिए आपको शरीर की उचित देखभाल करनी चाहिए। जब इस खजाने को खोजकर उसका उचित उपयोग कर लिया जाए, तब शरीर को त्याग दिया जा सकता है। जीवन जीने का यही उचित मार्ग है।.…Sathya Sai Baba1

  1. गुर्दों की संरचना, बनावट और कार्य

1.1 गुर्दे मूत्र प्रणाली के सबसे महत्वपूर्ण और प्रमुख अंग हैं। मूत्र प्रणाली हमारे शरीर की उत्सर्जन प्रणाली का एक प्रमुख भाग है। गुर्दों का मुख्य कार्य रक्त को छानना, शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखना तथा रक्त की मात्रा और रक्तचाप को नियंत्रित करना है।2,3

1.2 सामान्यतः प्रत्येक व्यक्ति के शरीर में दो गुर्दे होते हैं। ये मुट्ठी के आकार के, सेम के आकार के अंग हैं, जो रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर, पसलियों के ठीक नीचे पीठ के निचले हिस्से में स्थित होते हैं और अच्छी तरह सुरक्षित रहते हैं। दायाँ गुर्दा बाएँ गुर्दे की तुलना में थोड़ा छोटा होता है। गुर्दों का वजन व्यक्ति की लंबाई, वजन, आयु और बॉडी मास इंडेक्स (BMI) पर निर्भर करता है। प्रत्येक गुर्दे में 10 लाख से अधिक सूक्ष्म छनन इकाइयाँ, जिन्हें नेफ्रॉन (Nephrons) कहा जाता है, होती हैं। ये नेफ्रॉन मूत्र निर्माण की जटिल प्रक्रिया को पूरा करते हैं। मूत्रवाहिनियाँ (Ureters) मांसपेशीय नलिकाएँ हैं, जो प्रत्येक गुर्दे को मूत्राशय (Urinary bladder) से जोड़ती हैं। मूत्राशय एक मांसपेशीय थैलीनुमा अंग है, जो मूत्र को शरीर से बाहर निकालने तक अस्थायी रूप से संग्रहित करता है। गुर्दों से मूत्र थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लगभग हर 10–15 सेकंड में मूत्रवाहिनियों के माध्यम से मूत्राशय में पहुँचता रहता है। एक स्वस्थ वयस्क का मूत्राशय सामान्यतः लगभग ½ लीटर मूत्र को 2 से 5 घंटे तक रोककर रख सकता है।मूत्रमार्ग (Urethra) वह नली है जो मूत्राशय से मूत्र को शरीर के बाहर ले जाती है। मूत्राशय के द्वार के चारों ओर रबर-बैंड की तरह काम करने वाली दो स्फिंक्टर मांसपेशियाँ होती हैं, जो मूत्र को अनियंत्रित रूप से बाहर निकलने से रोकने में सहायता करती हैं। मूत्राशय में मौजूद तंत्रिकाएँ मस्तिष्क को संकेत देती हैं कि मूत्र त्याग करने का समय हो गया है। प्रत्येक गुर्दे के ऊपर एक-एक अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal gland) होती है। ये ग्रंथियाँ गुर्दों के साथ मिलकर रक्तचाप और शरीर में द्रव-संतुलन को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके अतिरिक्त, अधिवृक्क ग्रंथियाँ अंतःस्रावी (endocrine) ग्रंथियों के रूप में भी स्वतंत्र कार्य करती हैं।2-9

1.3 गुर्दों के कार्य की तीन मुख्य प्रक्रियाएँ जब रक्त वृक्क धमनियों (Renal arteries) के माध्यम से गुर्दों में प्रवेश करता है, तो नेफ्रॉन में मुख्यतः तीन प्रक्रियाएँ होती हैं: छनन (Filtration): रक्तचाप के कारण पानी, यूरिया, क्रिएटिनिन, अम्ल, लवण और ग्लूकोज़ जैसी छोटी पदार्थों को सूक्ष्म छनन इकाइयों से होकर गुजरने दिया जाता है, जबकि रक्त कोशिकाएँ और अधिकांश प्रोटीन रक्तप्रवाह में ही बने रहते हैं। पुनःअवशोषण (Reabsorption):इस प्रक्रिया में शरीर के लिए आवश्यक पदार्थ, जैसे ग्लूकोज़, अमीनो अम्ल, खनिज तथा छनकर निकले पानी का अधिकांश भाग वापस रक्त में पहुँच जाता है। स्राव (Secretion): इस प्रक्रिया में अतिरिक्त अपशिष्ट पदार्थ, अतिरिक्त अम्ल, कुछ औषधियाँ तथा विषैले पदार्थ रक्त से सक्रिय रूप से वृक्क नलिकाओं में पहुँचाए जाते हैं। इन प्रक्रियाओं के बाद बचा हुआ द्रव मूत्र बन जाता है। मूत्र गुर्दों से मूत्रवाहिनियों के रास्ते मूत्राशय में पहुँचता है और वहाँ से मूत्रमार्ग द्वारा शरीर से बाहर निकल जाता है।2-9

1.4 अद्भुत गुर्दे! मानव शरीर में लगभग 5 लीटर रक्त होता है, फिर भी गुर्दों से लगभग 1.2 लीटर रक्त प्रति मिनट गुजरता है—अर्थात लगभग 1,700 लीटर रक्त प्रतिदिन। रक्त में लगभग 55% प्लाज़्मा और 45% रक्त कोशिकाएँ होती हैं। इसलिए प्रतिदिन लगभग 950 लीटर प्लाज़्मा गुर्दों से होकर गुजरता है। इसमें से लगभग 180 लीटर द्रव छनकर साफ होता है, लेकिन शरीर से प्रतिदिन 2 लीटर से भी कम मूत्र बाहर निकलता है। शेष द्रव पुनःअवशोषित होकर शरीर में वापस उपयोग किया जाता है। लगभग 300 ग्राम वजन होने के बावजूद गुर्दे एक अत्यंत उन्नत रासायनिक शोधन संयंत्र की तरह लगातार हमारे शरीर के द्रवों को छानने, संतुलित करने और शुद्ध करने का कार्य करते हैं !2-9

गुर्दे रक्त के अम्ल-क्षार (pH) संतुलन को भी नियंत्रित करते हैं। आवश्यकता पड़ने पर वे ग्लूकोज़ का निर्माण करते हैं तथा दो महत्वपूर्ण हार्मोन भी बनाते हैं: कैल्सिट्रिऑल (Calcitriol): विटामिन D का सक्रिय रूप, जो शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में सहायता करता है।एरिथ्रोपोइटिन (Erythropoietin): लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायता करने वाला हार्मोन। इस प्रकार, गुर्दे हमारे रक्त की सफाई करने वाली चौबीसों घंटे सक्रिय एक अद्भुत प्राकृतिक सफाई व्यवस्था हैं—शरीर के ये शांत, अनदेखे और अथक नायक लगातार हमारे शरीर के द्रवों को शुद्ध, संतुलित और स्वस्थ बनाए रखने में लगे रहते हैं!2-9

 2. गुर्दों के स्वास्थ्य के मानदंड (Parameters for Kidney Health)

गुर्दों के स्वास्थ्य का आकलन रक्त परीक्षण, मूत्र की जाँच तथा शारीरिक संकेतकों के संयोजन से किया जाता है।

2.1 सीरम क्रिएटिनिन परीक्षण (Serum Creatinine Test) क्रिएटिनिन (Creatinine) एक प्राकृतिक रासायनिक अपशिष्ट पदार्थ है, जो सामान्य मांसपेशीय गतिविधि और रोज़मर्रा की शारीरिक क्रियाओं के दौरान मांसपेशियों के टूटने से प्रतिदिन एक निश्चित मात्रा में बनता है। इसकी मात्रा व्यक्ति की मांसपेशियों की मात्रा, आयु, आहार और शारीरिक गतिविधि पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए, बॉडी बिल्डर में क्रिएटिनिन का स्तर स्वाभाविक रूप से अधिक हो सकता है। क्रिएटिनिन रक्तप्रवाह में पहुँचने के बाद स्वस्थ गुर्दों द्वारा लगभग पूरी तरह छान लिया जाता है और मूत्र के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाता है। एक साधारण रक्त परीक्षण द्वारा सीरम क्रिएटिनिन का स्तर निर्धारित किया जाता है। यह गुर्दों की छनन क्षमता का एक महत्वपूर्ण बायोमार्कर और विश्वसनीय संकेतक है। सामान्य सीमा लगभग: महिलाएँ:0.5–1.1 mg/dL, पुरुष: 0.7–1.3 mg/dL,क्रिएटिनिन का बढ़ा हुआ स्तर यह संकेत दे सकता है कि गुर्दे रक्त को ठीक से फ़िल्टर नहीं कर रहे हैं। हालांकि, इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं, जैसे निर्जलीकरण, मांसपेशियों के विकार या चोट, अधिक प्रोटीन वाला आहार, अत्यधिक व्यायाम, गर्भावस्था से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएँ या कुछ दवाएँ। क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ने पर सामान्य लक्षणों में भूख कम लगना, जी मिचलाना, उल्टी, खुजली और एनीमिया शामिल हो सकते हैं। बाद के चरणों में साँस लेने में कठिनाई भी हो सकती है। क्रिएटिनिन का स्तर कम होना अपेक्षाकृत दुर्लभ है और मुख्यतः कुपोषण, तंत्रिका संबंधी विकार, बढ़ती आयु के कारण मांसपेशियों की कमी या लंबे समय तक रहने वाली बीमारी के कारण हो सकता है।2,9-13

2.2 eGFR — अनुमानित ग्लोमेरुलर छनन दर(estimated Glomerular Filtration Rate), गुर्दों के कार्य का अधिक सटीक और समग्र रूप से महत्वपूर्ण संकेतक है। यह बताता है कि गुर्दे प्रति मिनट कितने मिलीलीटर रक्त को फ़िल्टर कर रहे हैं। eGFR की गणना एक गणितीय सूत्र द्वारा की जाती है, जिसमें रक्त में क्रिएटिनिन का स्तर, आयु, लिंग और शरीर का आकार जैसे कारकों को शामिल किया जाता है। 90 mL/min/1.73 m² या उससे अधिक का eGFR सामान्यतः स्वस्थ और सामान्य गुर्दा-कार्य का संकेत माना जाता है। इससे कम स्तर गुर्दों की कार्यक्षमता में कमी का संकेत दे सकता है। eGFR का उपयोग क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) की अवस्था निर्धारित करने में भी किया जाता है।9-13

2.3 ब्लड यूरिया नाइट्रोजन (BUN) परीक्षण:  जब शरीर प्रोटीन को पचाता है, तो यकृत (लिवर) में यूरिया नामक अपशिष्ट पदार्थ बनता है। यह रक्त के माध्यम से नाइट्रोजन के रूप में गुर्दों तक पहुँचता है और गुर्दे इसे फ़िल्टर करके मूत्र के माध्यम से शरीर से बाहर निकालते हैं। BUN (Blood Urea Nitrogen) परीक्षण रक्त में मौजूद यूरिया नाइट्रोजन की मात्रा को मापता है। इसका सामान्य स्तर आयु और लिंग के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। वयस्कों में सामान्य सीमा लगभग: महिलाएँ: 6–21 mg/dL, पुरुष: 8–24 mg/dL BUN का बढ़ा हुआ स्तर निर्जलीकरण, अधिक प्रोटीन वाले आहार या गुर्दों की कार्यक्षमता कम होने के कारण हो सकता है। हालाँकि, जब BUN और क्रिएटिनिन दोनों का स्तर बढ़ा हुआ हो, तो यह गुर्दों की कार्यक्षमता में गड़बड़ी का मजबूत संकेत हो सकता है।13,14

2.4 मूत्र परीक्षण (Urine Tests): uACR (Urine Albumin-to-Creatinine Ratio):IuACR एक महत्वपूर्ण स्क्रीनिंग परीक्षण है, जिसका उपयोग गुर्दों को होने वाली क्षति के शुरुआती संकेतों का पता लगाने के लिए किया जाता है। यदि मूत्र में एल्ब्यूमिन, जो एक प्रकार का प्रोटीन है, सामान्य सीमा से अधिक पाया जाता है—विशेषकर 30 mg/g से अधिक—तो यह गुर्दों को होने वाली क्षति का संकेत हो सकता है। मूत्र में लगातार अधिक झाग या बुलबुले दिखाई देना भी मूत्र में अतिरिक्त प्रोटीन की उपस्थिति का संकेत हो सकता है। यूरिनालिसिस (Urinalysis): यह एक त्वरित स्क्रीनिंग परीक्षण है, जिससे मूत्र में लाल या सफेद रक्त कोशिकाओं, संक्रमण या कुछ मात्रा में प्रोटीन के रिसाव का पता लगाया जा सकता है। यूरिन कल्चर टेस्ट (Urine Culture Test): यह परीक्षण उन बैक्टीरिया या फंगस की पहचान करने में सहायता करता है जो मूत्रमार्ग संक्रमण (UTI) का कारण बन सकते हैं। समय पर पहचान और उपचार से संक्रमण को गुर्दों तक फैलने से रोकने में सहायता मिलती है।2,9,13-15

2.5 गुर्दों के स्वास्थ्य के अन्य संकेतक oगुर्दों की कार्यक्षमता में गड़बड़ी के अन्य संकेतों में शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स, जैसे सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम और फॉस्फोरस का असंतुलन, अनियंत्रित रक्तचाप तथा मूत्र के रंग में परिवर्तन शामिल हो सकते हैं। मूत्र का रंग और गंध गुर्दों और मूत्राशय के स्वास्थ्य के बारे में शुरुआती संकेत दे सकते हैं। इनके माध्यम से निर्जलीकरण, संक्रमण तथा गुर्दों पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव जैसी संभावित समस्याओं का संकेत मिल सकता है। स्वस्थ व्यक्ति का सामान्य मूत्र प्रायः साफ, हल्के भूसे के रंग या पारदर्शी पीले रंग का होता है। गहरा पीला या शहद जैसा रंग: शरीर में पानी की कमी का संकेत हो सकता है; अधिक पानी पीने की आवश्यकता हो सकती है।गहरा या भूरापन लिए रंग: यकृत की समस्या या गंभीर निर्जलीकरण का संकेत हो सकता है।चाय या कोला जैसा गहरा भूरा रंग: गुर्दों की गंभीर बीमारी या गुर्दों की विफलता का संकेत हो सकता है। मूत्र के रंग में ऐसे परिवर्तन महिलाओं, वृद्ध व्यक्तियों तथा उन लोगों में अधिक देखे जा सकते हैं जिनके परिवार में गुर्दे या मूत्राशय की पथरी का इतिहास रहा हो। यदि मूत्र के रंग में असामान्य परिवर्तन कुछ दिनों से अधिक समय तक बना रहे और उसका संबंध किसी विशेष भोजन या दवा से न हो, तो चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।16,17

3. गुर्दों से संबंधित रोग (Kidney Disorders)

3.1 मूत्र मार्ग संक्रमण (Urinary Tract Infection – UTI): मूत्र मार्ग में मूत्राशय, मूत्रमार्ग और गुर्दे शामिल होते हैं। UTI सामान्यतः मूत्र मार्ग के निचले हिस्से में होने वाला जीवाणु संक्रमण है, जिसके कारण सूजन और जलन हो सकती है। इसके प्रमुख लक्षण हैं: पेशाब करते समय दर्द या जलन, मूत्र का लाल, हरा-सा, धुंधला या मटमैला दिखाई देना, बार-बार पेशाब आने की इच्छा, मूत्राशय खाली होने के बावजूद पेशाब करने की तीव्र इच्छा, मूत्र में रक्त आना, कमर के निचले हिस्से या पेट के निचले भाग में दबाव, दर्द या ऐंठन, महिलाओं में UTI अधिक सामान्य है, क्योंकि उनका मूत्रमार्ग छोटा होता है और मलाशय के अधिक निकट स्थित होता है। मूत्र से आने वाली तेज़ या दुर्गंधयुक्त गंध मूत्रमार्ग (urethritis), मूत्राशय (cystitis), जो सबसे सामान्य है) या गुर्दों (pyelonephritis, जो कम सामान्य लेकिन अधिक गंभीर है) में जीवाणु संक्रमण का संकेत हो सकती है। यदि संक्रमण गंभीर हो जाए, तो बुखार, ठंड लगना, कमर या पीठ के एक तरफ तेज़ दर्द तथा जी मिचलाना या उल्टी जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।18-22

3.2 गुर्दे की पथरी (Kidney Stones) (Renal calculi/Nephrolithiasis), पुरुषों में अधिक सामान्य होती है। जब मूत्र में मौजूद कुछ क्रिस्टल आपस में जुड़कर कठोर पथरी का रूप ले लेते हैं, तो वे गुर्दे, मूत्रवाहिनी या मूत्राशय में बनकर मूत्र के प्रवाह में रुकावट पैदा कर सकते हैं। इसके लक्षण UTI के समान हो सकते हैं। सबसे सामान्य लक्षण हैं: कमर के निचले हिस्से, बगल या पेट में दर्द, बार-बार पेशाब आना, अचानक और बार-बार पेशाब करने की तीव्र इच्छा, रेत के कण जितनी छोटी पथरी भी मूत्र के साथ बाहर निकल सकती है, हालांकि कभी-कभी इसमें काफी दर्द होता है। बड़ी पथरी मूत्रवाहिनी या मूत्रमार्ग में फँस सकती है। पथरी बनने के प्रमुख कारणों में ऑक्सलेट, सोडियम या शर्करा की अधिक मात्रा वाला आहार, कैल्शियम की कम मात्रा वाला आहार, विटामिन C और कैल्शियम सप्लीमेंट्स का अत्यधिक सेवन तथा पर्याप्त पानी न पीना शामिल हो सकते हैं। पशु-आधारित प्रोटीन से यूरिक एसिड की पथरी बनने की संभावना बढ़ सकती है।स्ट्रैंग्यूरिया (Strangury) एक चेतावनी संकेत है, जो पथरी या ट्यूमर जैसी अंतर्निहित समस्या की ओर संकेत कर सकता है। इसमें लगातार और अत्यधिक तीव्रता से पेशाब करने की इच्छा होती है, साथ में पेट के निचले हिस्से में दर्दनाक ऐंठन या मांसपेशियों के संकुचन होते हैं और जोर लगाने के बावजूद एक समय में केवल कुछ बूंदें ही मूत्र निकल पाती हैं।23,24

3.3 बिस्तर गीला करना / रात्रिकालीन मूत्र असंयम (Bedwetting – Nocturnal Enuresis) बिस्तर गीला करना नींद के दौरान अनजाने में मूत्र निकल जाने को कहते हैं। यह बच्चों, किशोरों और वयस्कों को भी प्रभावित कर सकता है। अधिकांश बच्चों में उम्र बढ़ने और मूत्राशय पर बेहतर नियंत्रण विकसित होने के साथ यह समस्या अपने आप समाप्त हो जाती है। यदि 12 वर्ष से अधिक आयु का बच्चा लगातार कम-से-कम तीन महीने तक सप्ताह में दो बार बिस्तर गीला करता रहे, तो इस पर ध्यान देना आवश्यक है। हालाँकि यह सामान्यतः गंभीर समस्या नहीं होती, फिर भी इससे बच्चे में तनाव या भावनात्मक परेशानी हो सकती है। इसके पीछे आनुवंशिक कारण या कोई अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या हो सकती है। मुख्य कारणों में शामिल हैं: मूत्राशय का धीरे-धीरे परिपक्व होना, बहुत गहरी नींद, तंत्रिका संबंधी समस्या, वैसोप्रेसिन (ADH) नामक एंटी-डाययूरेटिक हार्मोन का कम स्तर, कब्ज, UTI, मधुमेह, स्लीप एपनिया, ऐसे व्यक्तियों को सोने से कम-से-कम दो घंटे पहले पानी पीने से बचने की सलाह दी जाती है।25

3.4 रक्तमेह / मूत्र में रक्त (Haematuria) हीमैचूरिया (Haematuria) का अर्थ है मूत्र में लाल रक्त कोशिकाओं की उपस्थिति। इसके कारण मूत्र गुलाबी या लाल दिखाई दे सकता है। यह एक चेतावनी संकेत है और इसकी जाँच कराना आवश्यक है। कभी-कभी मूत्र में रक्त दिखाई नहीं देता और केवल प्रयोगशाला परीक्षण से ही इसका पता चलता है। इसके संभावित कारणों में शामिल हैं: UTI, गुर्दों में सिस्ट, अत्यधिक या कठिन व्यायाम, मूत्र प्रणाली में चोट, पुरुषों में बढ़ी हुई प्रोस्टेट ग्रंथि, महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस, सिकल सेल रोग, गुर्दों के रोग, कैंसर।26

3.5 गंभीर गुर्दा रोग (Serious Kidney Diseases) गुर्दे की बीमारी को अक्सर “साइलेंट किलर” कहा जाता है, क्योंकि गुर्दों को काफी क्षति होने के बावजूद वे कुछ समय तक प्रभावी ढंग से काम करते रह सकते हैं। परिणामस्वरूप, कई बार तब तक स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते जब तक गुर्दों की कार्यक्षमता का लगभग 60% तक नुकसान न हो चुका हो। क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) और नेफ्रोपैथी (Nephropathy), जो सामान्यतः लंबे समय तक रहने वाले उच्च रक्तचाप और अनियंत्रित मधुमेह के कारण विकसित होते हैं, महीनों या वर्षों में धीरे-धीरे बढ़ते हैं और प्रायः स्थायी होते हैं। उच्च रक्तचाप और गुर्दों के बीच एक खतरनाक दोतरफा संबंध होता है। उच्च रक्तचाप गुर्दों को नुकसान पहुँचा सकता है, जबकि रोगग्रस्त गुर्दे भी रक्तचाप बढ़ा सकते हैं। क्षतिग्रस्त गुर्दे शरीर में नमक और पानी को रोकने लगते हैं, जिससे रक्तचाप और बढ़ सकता है। इस प्रकार एक दुष्चक्र बन जाता है। CKD की पाँच अवस्थाएँ होती हैं, जो हल्की बीमारी से लेकर गुर्दों की विफलता तक बढ़ती हैं। सामान्यतः तीसरे चरण के आसपास लक्षण अधिक स्पष्ट हो सकते हैं, जैसे: बार-बार पेशाब आना, थकान, भूख कम लगना, साँस फूलना, हाथों, टखनों और पैरों में सूजन, आँखों के आसपास फूला हुआ दिखाई देना, झागदार या बुलबुले वाला मूत्र, त्वचा का सूखना और खुजली, त्वचा का रंग गहरा होना, सुन्नपन, मांसपेशियों में ऐंठन, उच्च रक्तचाप, जी मिचलाना या उल्टी, एकाग्रता में कठिनाई नींद में परेशानी, नेफ्रोपैथी में इन लक्षणों के साथ मूत्र में लगातार प्रोटीन पाया जा सकता है। पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज (PKD) एक आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें गुर्दों में अनेक सिस्ट बन जाते हैं। इससे उच्च रक्तचाप और आगे चलकर गुर्दों की विफलता हो सकती है।2,27,28

3.6 गुर्दों को प्रभावित करने वाले अन्य विकार गुर्दों को कई अन्य विकार भी प्रभावित कर सकते हैं: एसिडोसिस (Acidosis): शरीर में अम्ल की अधिकता, जिसे गुर्दे पर्याप्त मात्रा में बाहर नहीं निकाल पाते और वह रक्त में जमा होने लगता है। एक्यूट नेफ्राइटिस (Acute Nephritis): गुर्दों में अचानक होने वाली सूजन। एज़ोटेमिया (Azotaemia): रक्त में नाइट्रोजनयुक्त अपशिष्ट पदार्थों का जमा होना। हाइड्रोनेफ्रोसिस (Hydronephrosis): मूत्र प्रणाली में रुकावट के कारण गुर्दे में मूत्र का जमा होकर गुर्दे का फूलना। प्रोटीन्यूरिया (Proteinuria): मूत्र में सामान्य से अधिक प्रोटीन की उपस्थिति, जो गुर्दों को होने वाली क्षति का संकेत हो सकती है। यूरीमिया (Uraemia): गुर्दों द्वारा विषैले अपशिष्ट पदार्थों को पर्याप्त रूप से साफ न कर पाने के कारण उनका शरीर में जमा होना। मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों में गुर्दों के विकार का जोखिम अधिक होता है। दुर्घटना या शारीरिक चोट से भी गुर्दों को नुकसान पहुँच सकता है।2

3.7 गुर्दों की विफलता (Kidney Failure) गुर्दों की विफलता अचानक भी हो सकती है। इसे एक्यूट किडनी इंजरी (AKI) कहा जाता है। इसका कारण गंभीर निर्जलीकरण, विषैले पदार्थों का प्रभाव या गुर्दों में रक्त के प्रवाह में अचानक कमी हो सकता है। यदि समय पर उपचार किया जाए, तो AKI कई मामलों में वापस ठीक हो सकती है। जब गुर्दे की बीमारी अंतिम अवस्था तक पहुँच जाती है और गुर्दे पर्याप्त रूप से कार्य करने में असमर्थ हो जाते हैं, तो उपचार के प्रमुख विकल्प डायलिसिस या गुर्दा प्रत्यारोपण होते हैं।9

3.7.1 डायलिसिस (Dialysis) डायलिसिस गुर्दों के सभी कार्यों को पूरी तरह से प्रतिस्थापित नहीं कर सकता, विशेषकर रक्त निर्माण और हड्डियों के स्वास्थ्य से संबंधित कार्यों को। इसलिए डायलिसिस पर रहने वाले रोगियों में एनीमिया, हड्डियों के चयापचय से संबंधित विकार, उच्च रक्तचाप तथा शारीरिक क्षमता में कमी जैसी समस्याएँ विकसित हो सकती हैं।9

3.7.2 गुर्दा प्रत्यारोपण (Kidney Transplant) यदि उपयुक्त दाता उपलब्ध हो, तो गुर्दा प्रत्यारोपण गुर्दों की अंतिम अवस्था की विफलता में एक महत्वपूर्ण उपचार विकल्प है। प्रत्यारोपण के बाद रोगी को जीवनभर इम्यूनोसप्रेसेंट (प्रतिरक्षा-दमनकारी) दवाएँ लेनी पड़ती हैं। ऐसा न करने पर शरीर प्रत्यारोपित गुर्दे को बाहरी अंग मानकर उसे अस्वीकार कर सकता है।9

4. एक गुर्दे के साथ जीवन!

गुर्दे हमारे शरीर के रिज़र्व (Reserve) अंगों में से एक हैं।कई महत्वपूर्ण अंग जोड़े में होते हैं। इसका एक कारण शरीर में दोनों ओर संतुलन बनाए रखना और दूसरे अंग के बीमार या क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध रखना है। अधिकांश लोग एक गुर्दे के साथ भी सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति जन्म से केवल एक गुर्दे के साथ है, तो उसकी कुल गुर्दा-कार्य क्षमता अक्सर सामान्य रह सकती है। एक स्वस्थ व्यक्ति अपना एक गुर्दा किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर सकता है। इसके बाद बचा हुआ गुर्दा दूसरे गुर्दे का कार्य अपने ऊपर लेकर तेजी से अनुकूलित हो सकता है और अक्सर अपनी मूल संयुक्त कार्यक्षमता का लगभग 70% तक कार्य कर सकता है। हालाँकि, एक ही गुर्दे को अधिक मेहनत करनी पड़ती है और वह चोट के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकता है। इसलिए ऐसे व्यक्ति को रक्तचाप और क्रिएटिनिन की नियमित जाँच जीवनभर करवानी चाहिए। प्रत्यारोपित गुर्दा सामान्य गुर्दे की तुलना में कम सुरक्षित होता है, क्योंकि उसे सामान्यतः शरीर के पेल्विस (श्रोणि) क्षेत्र में लगाया जाता है। एक ही कार्यशील गुर्दे वाले व्यक्तियों को ऐसे खेलों से बचना चाहिए जिनमें गुर्दे पर चोट लगने का जोखिम अधिक हो, जैसे: बॉक्सिंग, कुश्ती, मार्शल आर्ट्स, फील्ड या आइस हॉकी, फुटबॉल। ऐसे व्यक्ति को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उचित आहार और पर्याप्त जलयोजन बनाए रखना चाहिए। जीवित दाता से प्राप्त गुर्दा औसतन 15–20 वर्ष तक कार्य कर सकता है, जबकि मृत दाता से प्राप्त गुर्दे का औसत कार्यकाल लगभग 10–15 वर्ष हो सकता है। इसके बाद आवश्यकता पड़ने पर दूसरा गुर्दा प्रत्यारोपण किया जा सकता है।29-32

     किडनी की सेहत के लिए टिप्स2,11,33-37  

  • शरीर में पानी की कमी न होने दें। - नेचुरल तरीके से शरीर को साफ़ रखने के लिए, एक सामान्य वयस्क को रोज़ाना 2-3 लीटर सादा पानी पीना चाहिए - यह किडनी का सबसे अच्छा दोस्त है!
  • किडनी के लिए फ़ायदेमंद डाइट लें। - पौष्टिक और फ़ाइबर से भरपूर डाइट, हेल्दी फ़ैट और अच्छी क्वालिटी वाले प्लांट-बेस्ड प्रोटीन का सीमित मात्रा में सेवन करें; ज़्यादा नमक के बजाय तुलसी, अदरक, लहसुन, पार्सले, ओरेगैनो, रोज़मेरी और काली मिर्च जैसी जड़ी-बूटियों और मसालों का इस्तेमाल करें; बेरीज़ (खासकर क्रैनबेरी), चेरी, खट्टे फल, अनानास और सेब जैसे फल चुनें; ऊपर से चीनी न डालें!
  • अगर आपको किडनी की गंभीर बीमारी है, तो अपने खान-पान में बदलाव करें। जिन लोगों की किडनी ज़्यादा खराब हो चुकी है या जो डायलिसिस पर हैं, उन्हें तरल पदार्थों का सेवन कम करना पड़ सकता है और पोटैशियम से भरपूर चीज़ों (जैसे केला, आम, टमाटर, आलू) और फ़ॉस्फोरस वाली चीज़ों (जैसे डेयरी और डार्क कोला) का सेवन सीमित करना पड़ सकता है।
  • किडनी पर अनावश्यक दबाव डालने से बचें। प्रोसेस्ड और ज़्यादा सोडियम वाले खाने, मीठे ड्रिंक्स, शराब और तंबाकू का सेवन सीमित करें। एस्पिरिन और आइबुप्रोफ़ेन जैसी पेनकिलर दवाएं तभी लें जब बहुत ज़रूरी हो और डॉक्टर की सलाह पर लें। अनावश्यक सप्लीमेंट्स, खासकर कैल्शियम और विटामिन C की ज़्यादा डोज़ लेने से बचें।
  • अपनी किडनी की सेहत पर नियमित रूप से नज़र रखें। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़, दिल की बीमारी, मोटापा, किडनी की बीमारी की फ़ैमिली हिस्ट्री, बार-बार होने वाले इन्फेक्शन या नियमित दवा लेने वाले लोगों के लिए किडनी फ़ंक्शन टेस्ट हर साल करवाना बहुत ज़रूरी है।


References and Links

  1. Sathya Sai Speaks, Summer Course, 17 May 2000, Brindavan: https://saispeaks.sathyasai.org/discourse/human-body-and-its-importance
  2. Structure and functions of kidneys: https://my.clevelandclinic.org/health/body/21824-kidney
  3. https://www.hopkinsmedicine.org/health/wellness-and-prevention/anatomy-of-the-urinary-system
  4. Function of kidneys video: https://www.youtube.com/watch?v=CShAIAD-ask
  5. https://byjus.com/biology/human-excretory-system/
  6. https://www.niddk.nih.gov/health-information/kidney-disease/kidneys-how-they-work
  7. https://www.urologyhealth.org/healthy-living/urologyhealth-extra/magazine-archives/winter-2023-kidney-lumps-n-bumps/insights-what-do-the-kidneys-do-and-why-do-we-have-two
  8. https://www.nuhospitals.com/blog/know-your-kidneys/
  9. https://www.era-online.org/publications/understanding-kidneys/
  10. Parameters of kidney health: https://medlineplus.gov/lab-tests/creatinine-test/
  11. Understanding creatinine levels: https://www.apollo247.com/diagnostic-health-topics/creatinine-serum/your-kidney-health-monitor-understanding-and-managing-creatinine-levels
  12. Ideal Creatinine level: https://www.youtube.com/watch?v=hoCmv7ZpxAg
  13. Kidney function tests: https://my.clevelandclinic.org/health/diagnostics/21659-kidney-function-tests
  14. BUN blood test: https://my.clevelandclinic.org/health/diagnostics/17684-blood-urea-nitrogen-bun-test
  15. Urine tests: https://www.healthline.com/health/normal-urine-test-results-chart
  16. Urine changes: https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/15357-urine-changes
  17. Colour of urine: https://www.kidney.org/kidney-topics/what-color-your-urine-means
  18. UTI basics: https://www.cdc.gov/uti/about/index.html
  19. UTI: https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/9135-urinary-tract-infections
  20. https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/22858-urethritis
  21. https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/21203-bladder-inflammation-cystitis
  22. Kidney infection: https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/15456-kidney-infection-pyelonephritis
  23. Kidney stones: https://jsshospital.in/early-signs-of-kidney-stones/
  24. https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/15604-kidney-stones
  25. Bedwetting: https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/15075-bedwetting
  26. Haematuria/Blood in urine: https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/15234-hematuria
  27. CKD: https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/15096-chronic-kidney-disease
  28. Diabetic nephropathy: https://www.hopkinsmedicine.org/health/conditions-and-diseases/diabetes/diabetic-nephropathy-kidney-disease
  29. Organs in pairs: https://www.health.harvard.edu/blog/kidneys-eyes-ears-and-more-why-do-we-have-a-spare-202310202984
  30. https://www.kidney.org/kidney-topics/children-born-one-kidney#
  31. https://www.kidneyresearchuk.org/kidney-health-information/about-kidney-disease/living-with-one-kidney/
  32. https://www.health.harvard.edu/diseases-and-conditions/weak-kidneys-pay-attention-but-dont-worry-excessively
  33. Kidney friendly diet plan: https://www.kidneyfund.org/living-kidney-disease/healthy-eating-activity/kidney-friendly-eating-plan
  34. https://www.kidney.org/news-stories/spice-your-diet-7-kidney-friendly-seasonings
  35. https://www.healthline.com/health/kidney-cleanse#takeaway
  36. Kidney friendly fruits: https://www.medicinenet.com/what_fruit_is_good_for_kidneys/article.htm
  37. https://www.freseniuskidneycare.com/thrive-central/fruits-for-kidney-disease

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2. कार्यशालाएँ और सेमिनार

2.1 संस्थापकों का पता, साई निलयम, पुणे महाराष्ट्र, 1 मार्च 2026 

SVIRT Training Head 10375, और पुणे के 12 प्रैक्टिशनर्स ने 1 मार्च 2026 को संस्थापकों और उनकी बेटी (जो SVIRT की सदस्य00030 हैं) का उनके शहर में स्वागत करते हुए खुशी जताई। इस दौरे की शुरुआत एक इंटरैक्टिव सेशन से हुई, जिसमें डॉ. अग्रवाल ने प्रैक्टिशनर्स के सवालों के जवाब दिए और उत्साहित लोगों को वाइब्रियोनिक्स बैज बांटे। इसके बाद साई वाइब्रियोनिक्स पर एक जागरूकता कार्यक्रम हुआ, जिसमें लगभग 50 भक्त, कई समिति संयोजक और SSSO के नेशनल स्पिरिचुअल कोऑर्डिनेटर श्री कृष्ण रेवणकर शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और स्वागत भाषण से हुई, जिसके बाद संस्थापकों ने अपने विचार रखे।

डॉ. अग्रवाल ने 1994 में स्वामी के आशीर्वाद से पुट्टापर्थी और व्हाइटफील्ड में साई वाइब्रियोनिक्स की शुरुआत के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि शुरुआती सालों में, कई भक्तों, खासकर विदेशों से आए लोगों को प्रशांत निलयम में उनके आश्रम के कमरे में ट्रेनिंग दी गई थी। उन्होंने वाइब्रेशन की सूक्ष्म प्रकृति, वाइब्रियोनिक्स उपचार के काम करने के तरीके और इस हीलिंग सेवा के ज़रिए मरीज़ों की सेवा करने के लिए ज़रूरी समर्पण के बारे में भी बताया।

श्रीमती हेम अग्रवाल ने अपनी प्रैक्टिस से जुड़े प्रेरणादायक अनुभव साझा किए और दर्शकों के सवालों के जवाब दिए। प्रैक्टिशनर्स ने संस्थापकों को यादगार तोहफ़े (मेमेंटो) देकर अपना प्यार और आभार व्यक्त किया; उन्हें दगडूशेठ गणपति की सुंदर मूर्ति पाकर बहुत खुशी हुई। कार्यक्रम का समापन आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।

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2.2 वेस्ट लंदन, UK ऑनलाइन मीटिंग, 17 मई 2026

यूके के कोऑर्डिनेटर 02822 ने नियमित प्रार्थना और 16 उत्साही प्रतिभागियों के स्वागत के साथ बैठक की शुरुआत की। बैठक के मुख्य बिंदु इस प्रकार रहे:

प्रैक्टिशनर 02829, जो स्वयं एक चिकित्सक हैं, ने Soham Series of Natural Healing, भाग 6–7, पृष्ठ 4 से “Compassion, the Cosmic Energy” (करुणा, ब्रह्मांडीय ऊर्जा) विषय पर एक अंश प्रस्तुत किया। स्वामी नारायणी समझाती हैं कि प्रैक्टिशनर की भूमिका रोग को ठीक करना नहीं, बल्कि दिव्य करुणा के विनम्र माध्यम बनना है। प्रत्येक रोगी के प्रति प्रेम, सम्मान और इस जागरूकता के साथ व्यवहार करना चाहिए कि हम एक पवित्र स्थान पर खड़े हैं। एक स्नेहपूर्ण मुस्कान, ध्यानपूर्वक सुनना या सच्ची करुणा—दया नहीं—रोगी को सुरक्षित, सम्मानित और उपचार के लिए सहज महसूस करने में सहायता करती है। अहंकार को समर्पित करके और अपने भीतर तथा रोगी के भीतर दिव्य उपस्थिति को पहचानकर उपचार की ऊर्जा को स्वाभाविक रूप से प्रवाहित होने दिया जा सकता है। सच्चा उपचार तब आरंभ होता है जब रोगी को केवल एक बीमारी के रूप में नहीं, बल्कि मूल रूप से पूर्ण और पवित्र रूप में देखा जाता है।

प्रैक्टिशनर 02802, जो एक GP (जनरल प्रैक्टिशनर) हैं, ने अपनी प्रस्तुति में बताया कि अधिकांश बीमारियों में कोई न कोई मनोदैहिक (psychosomatic) पहलू हो सकता है, जैसे क्रोध, चिंता, भय और मन में रखी नाराज़गी, जिन्हें हमें छोड़ना चाहिए। उनकी PPT में Emotional Frequency Chart प्रस्तुत किया गया, जिसमें 500 से अधिक की आवृत्ति को सकारात्मक बताया गया। इस आवृत्ति को बढ़ाने का एक प्रभावी उपाय Ho’oponopono affirmation बताया गया। उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली के “9 स्तंभ” भी प्रस्तुत किए: संतुलित पोषण, शारीरिक गतिविधि एवं गहरी श्वास,मानसिक स्वास्थ्य एवं पर्याप्त नींद, हानिकारक पदार्थों से बचाव, निवारक स्वास्थ्य जाँच, स्वच्छता एवं सुरक्षा, सामाजिक जुड़ाव एवं अच्छे संबंध, आध्यात्मिक आस्था, प्रसन्नता। पूरी PPT हमारे Practitioners’ Site के Downloads → Forms अनुभाग में उपलब्ध है।

प्रैक्टिशनर 02894 ने अपने असाधारण अनुभव साझा किए, जिनमें विभूति का विशेष रूप से व्यक्तिगत रोगियों के लिए प्रकट होना शामिल था। इन प्रकटियों का संबंध संबंधित रोगियों की स्वास्थ्य समस्याओं से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ प्रतीत हुआ। शताब्दी वर्ष के विशेष प्रकाशन में प्रकाशित यूके के अन्य असाधारण अनुभवों और केस हिस्ट्रीज़ को भी पढ़कर सुनाया गया।

बैठक का समापन प्रस्तुतकर्ताओं, योगदानकर्ताओं और साझा सीख के लिए आभार व्यक्त करते हुए हुआ। अंत में Serenity Prayer और भक्तिपूर्ण कृतज्ञता के साथ बैठक संपन्न हुई।

मुख्य संदेश : नियमित केस चर्चाएँ प्रैक्टिशनरों के आत्मविश्वास और सीखने को मजबूत करती हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक है, जबकि तनाव कम करने के उपाय त्वरित राहत देने और उपचार प्रक्रिया में सहयोग करने में सहायक हो सकते हैं।

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2.3 पहला वार्षिक वर्चुअल ग्लोबल रिफ्रेशर सेमिनार, 30-31 मई 2026

यह रिफ्रेशर कार्यक्रम भारत, अमेरिका, फ्रांस और न्यूज़ीलैंड के 120 से अधिक प्रैक्टिशनरों के लिए वास्तव में उत्साहवर्धक और ज्ञानवर्धक अनुभव रहा। प्रतिभागियों के उत्साह, सक्रिय सहभागिता और अत्यंत सकारात्मक प्रतिक्रिया से प्रोत्साहित होकर अब प्रैक्टिशनर्स रिफ्रेशर हर वर्ष मई के अंतिम सप्ताहांत में आयोजित किया जाएगा।

पहले दिन दो सीनियर टीचर्स 10375 एवं 11422 ने प्रस्तुतियाँ दीं। उन्होंने क्रमशः “Vibrionics में विकसित होती उपचार पद्धतियाँ (Evolving Practices in Vibrionics)” और अच्छी केस हिस्ट्री कैसे लिखें (Writing Good Case Histories)” विषयों पर मार्गदर्शन दिया।

दूसरे दिन, वाइब्रिऑनिक्स टीचर11567 ने विभिन्न रोगों के लिए उपयुक्त आहार के बारे में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया तथा व्यावहारिक रूप से क्या करें और क्या न करें (Do’s and Don’ts) भी समझाए। इसके बाद गवर्नर11964 ने SVIRT, उसके नौ विभागों (Nine Wings) तथा प्रमुख प्रशासनिक प्रक्रियाओं का उपयोगी एवं विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया।

रिफ्रेशर कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण डॉ. अग्रवाल का अत्यंत प्रेरणादायक संबोधन रहा, जिसे श्रीमती हेम अग्रवाल के व्यावहारिक अनुभवों ने और समृद्ध किया। उनके संदेश का केंद्रीय भाव था कि वाइब्रिऑनिक्स का वास्तविक सार निःस्वार्थ प्रेम और शुद्ध हृदय से उपचार करने में निहित है, जिसमें छह विकारों से मुक्त रहना आवश्यक है।

जब प्रैक्टिशनर साधारण शुगर पिल्स के माध्यम से दिव्य उपचारात्मक स्पंदनों (Divine Healing Vibrations) का माध्यम बनते हैं, तब सर्वोत्तम परिणामों के लिए श्रद्धा, विचारों की शुद्धता और सच्ची प्रार्थना अत्यंत आवश्यक तत्व बन जाते हैं।

यद्यपि दिशा-निर्देशों का पालन, ज्ञान प्राप्त करना और रोगियों की समर्पित सेवा महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उतना ही महत्व आंतरिक परिवर्तन, आत्मनिरीक्षण, स्वयं की शुद्धि और प्रत्येक उपचार के माध्यम से उनके प्रेम को प्रवाहित होने देने को भी दिया जाना चाहिए।

कार्यक्रम का समापन एक इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ। इसमें प्रतिभागियों को उन रोगियों के उपचार के संबंध में स्पष्टता मिली जो वाइब्रिऑनिक्स के साथ-साथ होम्योपैथिक या आयुर्वेदिक उपचार भी ले रहे हैं। इसके अतिरिक्त, वाइब्रिऑनिक्स के ज्ञान को बढ़ाने के लिए अध्ययन के समय को मासिक रिपोर्टिंग घंटों में शामिल करने पर भी चर्चा हुई।

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3. कैंप और क्लिनिक

SSS सेवा समिति, औंध, पुणे, महाराष्ट्र, 8 जून 2026

प्रैक्टिशनर 10375 ने श्री सत्य साई प्रेम प्रवाहिनी रथ के स्थल पर ढाई घंटे का एक विशेष वाइब्रिऑनिक्स कैंप आयोजित किया। इस कैंप में 11 रोगियों का विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के लिए उपचार किया गया, जिनमें हर्पीज़, मस्से, सोरायसिस, लिपोमा, गठिया और व्यसन आदि शामिल थे। कई भक्तों को वाइब्रिऑनिक्स के पर्चे और फ्लायर्स वितरित किए गए, जिससे लोगों में काफी रुचि उत्पन्न हुई। इसके बाद कई लोगों ने प्रैक्टिशनर से उनकी क्लिनिक में परामर्श लेने के लिए अपॉइंटमेंट भी निर्धारित किए।

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4. उपाख्यान  

डॉ. जीत अग्रवाल की डायरी से - सूटकेस में पादुकाएँ:  सीमा पर मौन प्रहरी

यह जुलाई 1999 की बात है, जब स्वामी ने हमें चार बाल्कन देशों में पहली बार वर्कशॉप आयोजित करने के लिए भेजा था। उस समय यह क्षेत्र अभी भी युगोस्लाव युद्धों के दुष्परिणामों से उबर रहा था। अत्याचारों की स्मृतियाँ अभी भी बहुत ताज़ा थीं और नव-स्वतंत्र देशों के बीच हर सीमा पार करना मानो संदेह के घेरे में प्रवेश करने जैसा था। हथियारों से लैस सीमा चौकियाँ तनावपूर्ण, भयावह और अत्यंत कठोर थीं।

हमने स्लोवेनिया से क्रोएशिया तक गाड़ी से जाने का निर्णय लिया। हमारे साथ एक सूटकेस में कई SRHVP उपकरण थे। वे बिल्कुल हानिरहित थे, लेकिन सीमा अधिकारियों के लिए अपरिचित होने के कारण आसानी से गलत समझे जा सकते थे।

हमारी स्लोवेनियाई आयोजक नताशा स्पष्ट रूप से चिंतित थीं। उन्हें डर था कि पहले से ही तनाव में रहने वाले सीमा शुल्क अधिकारी इन पोटेंशाइज़र उपकरणों को किसी प्रकार के हथियार न समझ लें। काफी विचार-विमर्श के बाद हमने एक सरल योजना बनाई—सभी उपकरणों को एक ही सूटकेस में रखकर कपड़ों के नीचे अच्छी तरह छिपा देना और उनका ध्यान अपनी ओर आकर्षित न होने देना।  हमारे रवाना होने से एक रात पहले, जब हम सामान को व्यवस्थित कर रहे थे, मेरी पत्नी हेम ने पोटेंशाइज़र उपकरणों को एक दूसरे सूटकेस में रख दिया। यह निर्णय उन्होंने उसी समय लिया और मुझे बताना भूल गईं। मुझे बिल्कुल पता नहीं था कि सामान की व्यवस्था बदल चुकी है।जैसा कि आशंका थी, सीमा पर हमें रोक लिया गया। एक अधिकारी ने हमें गाड़ी की डिक्की खोलने का आदेश दिया। एक सूटकेस पर बंदूक ताने हुए उसने कड़ककर पूछा, इसमें क्या है?” मैंने शांतिपूर्वक और ईमानदारी से उत्तर दिया, कपड़े।”उसने वह सूटकेस नहीं खोला। केवल हेम जानती थीं कि यही वह सूटकेस था जिसमें सभी पोटेंशाइज़र और स्वामी की पादुकाएँ रखी थीं। उन्होंने मन ही मन राहत की एक बहुत लंबी साँस ली। इसके बाद पहरेदारों ने दूसरे सूटकेस की ओर इशारा किया और उसे खोल दिया। मेरा दिल बैठ गया। मुझे पूरा विश्वास था कि उपकरण इसी सूटकेस में छिपे हुए हैं। लेकिन जैसे ही उन्होंने ज़िप खोली, अंदर केवल सलीके से तह किए हुए कपड़े दिखाई दिए।

बाद में जाकर मुझे पता चला कि आखिरी क्षण में हेम ने सामान बदल दिया था। उनका वह अचानक लिया गया निर्णय, जिसके बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं थी, हमें एक ऐसी पूछताछ से बचा गया जो बहुत कठिन और संभवतः खतरनाक भी हो सकती थी। धन्यवाद, स्वामी! इस घटना का अगला भाग अगले अंक में जारी रहेगा…

 

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5.श्रद्धांजलि

प्रेमपूर्ण स्मरण के साथ, हम अपनी प्रिय प्रैक्टिशनर Božica Belec 01272 क्रोएशिया को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिन्होंने 19 मई 2026 को 73 वर्ष की आयु में अपनी नश्वर देह का त्याग किया। बोज़िका वर्ष 1995 में स्वामी की शरण में आईं और 1997 में वाइब्रिऑनिक्स प्रैक्टिशनर बनीं। लगभग तीन दशकों तक उन्होंने प्रेमपूर्वक अपने परिवार के सदस्यों, मित्रों, पड़ोसियों और सहायता के लिए उनके पास आने वाले सभी लोगों को उपचार प्रदान किया। वर्ष 2007 और 2008 में पुट्टपर्थी की यात्राओं के दौरान बाबा के दर्शन पाकर वे धन्य हुईं। जीवनभर उन्होंने अपनी श्रद्धा से शक्ति प्राप्त की। अपने लंबे समय तक चले क्रॉनिक मायलॉयड ल्यूकेमिया और बाद में स्तन कैंसर से संघर्ष के दौरान भी उनकी आस्था अटूट रही। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद, वे सदैव अपने रोगियों और आसपास के सभी लोगों को भावनात्मक सहारा देती रहीं और उनके लिए अनमोल सलाह का स्रोत बनी रहीं। परिवार, मित्रों और वाइब्रिऑनिक्स परिवार द्वारा उन्हें गहराई से याद किया जा रहा है। वे एक प्रकाशमान आध्यात्मिक ज्योति के रूप में सदैव स्मरणीय रहेंगी, जिनके प्रेम और उदारता ने अनेक लोगों के जीवन को स्पर्श किया। हम उनकी महान आत्मा की चिरशांति के लिए हृदय से प्रार्थना करते हैं।