Vol 17 अंक 5
सितंबर/अक्टूबर 2026
सिंहावलोकन
डॉ. जीत के. अग्रवाल की कलम से
डॉ. अग्रवाल हमारा मार्गदर्शन करते हैं कि हम स्वामी के प्रति अपनी कृतज्ञता को सार्थक रूप से किस प्रकार व्यक्त कर सकते हैं—स्वयं को सेवा के लिए उपलब्ध रखकर, वाइब्रियोनिक्स सेवा का विस्तार करके, प्रैक्टिशनर्स के बीच अधिक संवाद स्थापित करके ताकि हम एक-दूसरे के अनुभव साझा कर सकें, चर्चा कर सकें और एक-दूसरे से सीख सकें; व्यावहारिक चुनौतियों का समाधान करके, जहाँ भी आवश्यकता हो वहाँ तत्परता से सेवा देकर, समुदाय के रूप में अपनी सहभागिता को सुदृढ़ करने के लिए पहल करके, स्वास्थ्य एवं कल्याण को बढ़ावा देते हुए तथा स्वामी की सेवा में साथ-साथ निरंतर आगे बढ़ते हुए।
संपूर्ण अभिलेख पढ़ेरोगी तथा रोग का विवरण
इस अंक में बारह रोचक केस प्रस्तुत किए गए हैं, जिनमें शामिल हैं:मनोदशा संबंधी विकार, जिसमें मनोविकारी लक्षण भी थे,गंभीर निगलने में कठिनाई, दस्त एवं चिंता के दौरे,घुटने का दर्द,पुरानी खाँसी,एड़ी का दर्द, कंधे, पीठ एवं घुटने का दर्द, बिस्तर पर पेशाब निकल जाना, फ्रोजन शोल्डर, एक्जिमा,त्वचा पर घाव/घावनुमा lesions,मुहाँसे,लाइकेन स्ट्रायटस।
विवरण पढि़येचिकित्सक की रुपरेखा
पढ़िए और जानिए एक प्रैक्टिशनर की वाइब्रियोनिक्स तक पहुँचने और वर्ष 2020 में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद इस सेवा-मार्ग पर उनकी प्रेरणादायक एवं अद्भुत यात्रा के बारे में। साथ ही, उन्होंने अपने कुछ यादगार रोगों के उपचारों को भी साझा किया है!
रुपरेखाएं पढि़येप्रश्नोत्तर
पढ़िए और जानिए: जब किसी रोगी की शराब पीने या धूम्रपान करने की आदत उपचार में विलंब कर सकती हो, तब उसे इन आदतों से दूर रहने के लिए किस प्रकार समझाएँ और प्रेरित करें। CC9.2 Infections acute बार-बार देने के बाद भी तेज़ बुखार बना रहे तो ऐसी स्थिति में कैसे संभालें। SRHVP से मिलने वाले अतिरिक्त लाभ क्या हैं और किसी प्रैक्टिशनर को SVP बनने पर क्यों विचार करना चाहिए। Pullout को आश्वस्त करने वाले तरीके से कैसे समझाएँ, ताकि रोगी इसे पहचानकर इसकी सूचना देने के लिए प्रोत्साहित हो और उसका आत्मविश्वास बढ़े। क्या rods, plates, screws या joint replacements जैसे धातु के इम्प्लांट वाले रोगी को रेमेडीज़ सुरक्षित रूप से दी जा सकती हैं और इस संबंध में किन सावधानियों को ध्यान में रखना चाहिए।
संपूर्ण अभिलेख पढ़ेदिव्य चिकित्सक के दिव्य वचन
स्वामी प्रेमपूर्वक हमारा मार्गदर्शन करते हैं कि भोजन के तीन प्रकारों का स्वरूप और स्वाद क्या है तथा उनका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है। वे यह भी बताते हैं कि भोजन किस प्रकार पकाया, परोसा और ग्रहण किया जाता है, इसका भी महत्व है। साथ ही, स्वामी हमें निष्काम सेवा करने की प्रेरणा देते हैं—ऐसी सेवा जो किसी भी प्रकार के स्वार्थ या व्यक्तिगत हित से पूर्णतः मुक्त हो।
संपूर्ण अभिलेख पढ़ेघोषणाएँ
आगामी कार्यशालाएँ यूके, लंदन, दिल्ली और पुट्टपर्थी, भारत में आयोजित की जाएँगी।
संपूर्ण अभिलेख पढ़ेइसके अतिरिक्त
• स्वास्थ्य संबंधी लेख: “हमारी एक्सोक्राइन ग्रंथियों को जानें और उनकी रक्षा करें” शीर्षक लेख में प्रमुख पाचन-संबंधी एक्सोक्राइन अंगों और ग्रंथियों के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसमें यकृत और उसकी कार्य-विकृतियाँ, एक्सोक्राइन अग्न्याशय, गैस्ट्रिक एवं ब्रूनर ग्रंथियाँ, लार ग्रंथियाँ, स्वेद ग्रंथियाँ तथा उनसे संबंधित विकार, वसामय ग्रंथियाँ, अश्रु ग्रंथियाँ और कान की मैल बनाने वाली सेरुमिनस ग्रंथियाँ तथा प्रजनन संबंधी एक्सोक्राइन ग्रंथियाँ शामिल हैं। इसमें सभी ग्रंथियों को स्वस्थ रखने के लिए उपयोगी टिप्स भी दिए गए हैं, जैसे पित्त के स्वास्थ्य का ध्यान रखना, अत्यधिक पसीने को नियंत्रित करना, शरीर की दुर्गंध को रोकने एवं उसके लिए प्राकृतिक उपाय, कान की मैल को मुलायम रखना तथा उसके जमाव से होने वाली रुकावट को रोकना। • पुट्टापर्थी में आयोजित AP, AVP और SVP वर्कशॉप का सारांश; दिल्ली में श्री सत्य साईं यूनिटी रन एंड राइड में वाइब्रियोनिक्स सेवा, और हैदराबाद में BHEL के मेडिटेशन सेंटर में एक कैंप का उद्घाटन; साथ ही तस्वीरें भी। • उपाख्यान : पहला, “डॉ. जीत के. अग्रवाल की डायरी से: बॉर्डर पर चमत्कार”, और दूसरा, स्वामी का आशीर्वाद: प्रेम बहने दो! • श्रद्धांजलि: महाराष्ट्र के एक 80 वर्ष से अधिक आयु के
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