डॉ. जीत के अग्रवाल की कलम से
Vol 16 अंक 6
नवंबर/दिसंबर 2025
प्रिय प्रैक्टीशनर्स,
जैसे-जैसे हम भगवान के शताब्दी समारोह के इस पवित्र वर्ष में आगे बढ़ रहे हैं, हमारे हृदय गहन कृतज्ञता से परिपूर्ण हैं। हम उन सभी प्रैक्टिशनर्स के प्रति अपना हार्दिक आभार और सम्मान व्यक्त करते हैं, जिन्होंने हमारे सामूहिक शताब्दी भेंट के लिए अपने बहुमूल्य अनुभव, सफल केस हिस्ट्री और सेवा शिविरों की जानकारी शेयर की है। आपके निःस्वार्थ और सच्चे योगदान स्वामी द्वारा परिकल्पित वाइब्रियोनिक्स मिशन में एकता, प्रेम और समर्पण की भावना को सुंदर रूप से प्रतिबिंबित करते हैं।
"मनुष्य सामाजिक प्राणी है और समाज की सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है। ऐसी सेवा बिना किसी जाति, धर्म, नस्ल या राष्ट्रीयता के भेदभाव के बिना की जानी चाहिए। सभी धर्मों का सार एक ही है, जैसे एक ही विद्युत धारा अनेक कार्यों में प्रयुक्त होती है, फिर भी ऊर्जा वही रहती है। समाज की सेवा करते समय सत्य, धर्म, शांति और प्रेम—इन चार आदर्शों को सदैव ध्यान में रखना चाहिए।…Sri Sathya Sai Baba, Jan 1985, Chennai, https://saispeaks.sathyasai.org/discourse/seva-highest-sadhana
हमारी तीनों संपादकीय टीमें प्राप्त हुई विशाल सामग्री को संकलित करने और परिष्कृत करने के लिए निरंतर अथक परिश्रम कर रही हैं। जिनके पास अब भी कोई असाधारण प्रकरण या अनुभव साझा करने के लिए उपलब्ध हैं, उनसे हम स्नेहपूर्वक अनुरोध करते हैं कि वे उन्हें अवश्य भेजें। यद्यपि इस अंतिम चरण में सभी प्रविष्टियों को सम्मिलित कर पाना संभव न हो, फिर भी निश्चिंत रहें कि आपके अमूल्य योगदानों को भविष्य के न्यूज़लेटर एवं प्रकाशनों में उचित स्थान अवश्य मिलेगा।
हमारी कृतज्ञता की अभिव्यक्ति केवल वर्तमान में तैयार हो रही तीन पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 2026 और उसके बाद भी निरंतर जारी रहेगी। आइए, हम सब मिलकर इस सामूहिक अर्पण को और अधिक प्रभावशाली बनाएँ। इसके लिए हम कुछ प्रेरणादायक लक्ष्यों को निर्धारित कर सकते हैं:
• प्रत्येक प्रैक्टिशनर द्वारा व्यक्तिगत रूप से 100 नए रोगियों की सेवा• 100 नए सेवा शिविर स्थलों की स्थापना• 100 जन-जागरूकता अभियानों का आयोजन• 100 नए उपचार प्रकरणों (केस हिस्ट्री) का प्रलेखन
प्रत्येक लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए एक समर्पित नेतृत्वकर्ता की आवश्यकता होगी, जो पहल को सक्रिय रूप से आगे ले जा सके। इन उपलब्धियों को प्राप्त करने वाले प्रैक्टिशनरों अथवा क्षेत्रों को हमारे न्यूज़लेटर के माध्यम से सम्मानित और प्रोत्साहित करते हुए हमें अत्यंत प्रसन्नता होगी। आशा है कि यह हम सभी को इन साझा लक्ष्यों की ओर नव उत्साह और संकल्प के साथ अग्रसर होने की प्रेरणा देगा।
हमारा शिक्षा विभाग भी प्रैक्टिशनरों की संख्या बढ़ाने और भारत के दूरदराज़ क्षेत्रों तक पहुँच बनाने के लिए निरंतर अथक प्रयास कर रहा है। इसी उद्देश्य को साकार करने हेतु, इस पावन वर्ष में स्वामी को एक विनम्र सामूहिक अर्पण के रूप में हम “ब्रिंग योर बडी” पहल प्रस्तुत करते हुए अत्यंत हर्ष अनुभव कर रहे हैं। हम प्रत्येक प्रैक्टिशनर से आग्रह करते हैं कि वे कम से कम अपने एक परिवारजन, मित्र, पड़ोसी अथवा रोगी को प्रैक्टिशनर बनने के लिए प्रेरित करें, ताकि वे वाइब्रियोनिक्स के माध्यम से मानवता की सेवा कर सकें।आंतरिक एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति को और सुदृढ़ करने के लिए, हम न केवल पुट्टपर्थी में, बल्कि अधिक सहभागिता वाले क्षेत्रीय केंद्रों पर भी स्थानीय भाषाओं में कार्यशालाओं के आयोजन की योजना बना रहे हैं।
इसी क्रम में, हम क्षेत्रीय भाषाओं में दक्ष स्वयंसेवकों को आमंत्रित करते हैं कि वे वाइब्रियोनिक्स के पाठ्यक्रम सामग्री एवं न्यूज़लेटरों का भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने में सहयोग दें। हमारी आईटी टीम इस पुनीत सेवा को सुचारु रूप से संपन्न करने हेतु पूर्ण प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता प्रदान करेगी।
जैसे-जैसे हम निरंतर आगे बढ़ रहे हैं और विकसित हो रहे हैं, हमारा उद्देश्य न्यूज़लेटर को और अधिक जीवंत, समावेशी तथा प्रेरणादायक बनाना भी है। सेक्शन 2 में, जहाँ अब तक प्रत्येक अंक में दो प्रैक्टिशनरों के प्रोफ़ाइल प्रकाशित किए जाते रहे हैं, इस खंड को और विस्तृत करने का एक अत्यंत मूल्यवान सुझाव प्राप्त हुआ है। आगे चलकर, हम इसमें प्रैक्टिशनरों द्वारा की गई असाधारण सेवा के प्रेरणादायक विवरण सम्मिलित करने की योजना बना रहे हैं—चाहे वे व्यक्तिगत हों या सामूहिक प्रयास। इसके साथ ही, वाइब्रियोनिक्स पर चिंतन, समग्र स्वास्थ्य तथा ऐसे उपचार अनुभव भी शामिल किए जाएँगे जो पारंपरिक केस हिस्ट्री प्रारूप में समाहित नहीं हो पाते।इस खंड को और अधिक प्रेरक बनाने हेतु आपके विचारों एवं योगदानों का हम हृदय से स्वागत करते हैं। आइए, हम सभी स्वामी के मिशन में एकजुट होकर, हाथ में हाथ डालकर आगे बढ़ें और वाइब्रियोनिक्स का प्रकाश हर उस घर और हृदय तक पहुँचाएँ, जहाँ इसकी आवश्यकता है।
“प्रेमस्वरूपों! उस दिन पर ध्यान न दें जब शरीर का जन्म हुआ और स्वार्थपूर्ण उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उस घटना को आडंबरपूर्ण ढंग से मनाया जाए। जिस दिन आप अपने हृदय में शुद्ध भावनाओं को प्रकट करते हैं, अपने विचारों में दैवी सिद्धांत के प्रति अटल श्रद्धा स्थापित करते हैं और दूसरों की सेवा के लिए निःस्वार्थ उत्साह का विकास करते हैं—वही दिन ‘वास्तविक जन्मदिन’ के रूप में मनाए जाने योग्य है। सेवा आपको ईश्वर की सर्वव्यापकता का अनुभव करा सकती है… जहाँ आवश्यकता हो, जब भी बुलाया जाए, सेवा की प्रेरणा से आपको बिना किसी संकोच के अपनी सेवा अर्पित करने की दिशा में ले जानी चाहिए।”।…Sri Sathya Sai Baba, Nov 23 1984, Prasanthi Nilayam, https://saispeaks.sathyasai.org/discourse/real-birthday.
स्वामी के शताब्दी जन्मोत्सव के पावन अवसर पर, आप सभी से अनुरोध है कि इस दिव्य उत्सव में आनंदपूर्वक सहभागिता करें तथा उनके शाश्वत संदेश — “सबसे प्रेम करो, सबकी सेवा करो” — के प्रति स्वयं को पुनः समर्पित करें।
साई की प्रेममय सेवा में
जीत के अग्रवाल