साई व्हाइब्रियोनिक्स पत्रिका

" जब आप किसी हतोत्साहित, निराष या रोग ग्रस्त व्यक्ति को देखते हो, वहीं आपका सेवा क्षेत्र है " Sri Sathya Sai Baba
Hands Reaching Out

दिव्य चिकित्सक के दिव्य वचन

Vol 17 अंक 1
जनवरी/ फरवरी 2026


 

 

"अपना भोजन समय पर करें। पेट भरकर खाएँ। अपने माता-पिता द्वारा दिए गए भोजन का स्वाद लें और उसका आनंद उठाएँवह भोजन जिसे उन्होंने कड़ी मेहनत से जुटाया है। उसमें कभी कोई कमी न निकालें और न ही उसे खाने से मना करें। यदि आप उसे प्रेमपूर्वक और रुचि लेकर खाते हैं, तो वह आपके शरीर का भली-भांति पोषण करता है। तब आपका शरीर किसी भी हद तक काम करने में सक्षम हो जाता है।"

  …Sathya Sai Baba, Health is Wealth, Divine Discourse, Summer Showers, 27 May 2002

https://sssbpt.info/summershowers/ss2002/ss2002d12.pdf

 

"सेवा का पहला पाठ परिवार के दायरे में ही सीखना होता है। पिता, माता, भाई, बहनइस सीमित और आपस में मज़बूती से जुड़े समूह में रहकर ही व्यक्ति को प्रेमपूर्ण सेवा में संलग्न होना चाहिए और घर के बाहर प्रतीक्षा कर रही व्यापक सेवा के लिए स्वयं को तैयार करना चाहिए। परिवार के प्रत्येक सदस्य का चरित्र ही परिवार की शांति और समृद्धि निर्धारित करता है; और प्रत्येक परिवार का चरित्र ही वह मूल कारक है जो किसी गाँव या समुदाय की खुशी और आनंद का निर्णय करता है। तथा राष्ट्र की प्रगति उन समुदायों की शक्ति और खुशी पर आधारित होती है, जो उसके घटक हैं। अतः, देश और संपूर्ण विश्व के कल्याण के लिए, सेवा-भाव, जीवंत उत्साह, रचनात्मक कल्पना, शुद्ध प्रेरणा और निस्वार्थ सजगताइन सभी की अत्यंत आवश्यकता है।"

…Sathya Sai Baba, Lessons on Seva Sadhana, 19 Nov 1981, Sevadal Conference

https://www.ssssahitya.org/discourses/1981/lessons-on-seva-sadhana