डॉ. जीत के अग्रवाल की कलम से
Vol 17 अंक 1
जनवरी/ फरवरी 2026
प्रिय प्रैक्टीशनर्स
प्रशांति निलयम में शताब्दी जन्मोत्सव और क्रिसमस के पावन अवसर पर उपस्थित रहना अत्यंत भावपूर्ण और स्पर्श करने वाला अनुभव था। प्रत्येक प्रार्थना, आत्मा को झंकृत कर देने वाले प्रत्येक भजन, प्रत्येक सेवा कार्य और प्रत्येक शांत क्षण में हमने स्वामी की उपस्थिति को अनुभव किया, जो हमारे दिलों को गहन आभार और कृतज्ञता से भर रही थी कि हमें उनकी सेवा का अवसर मिला। वही पवित्र अनुभूति इस समाचार-पत्र की भावना का मार्गदर्शन कर रही है, यह स्मरण कराते हुए कि उनका प्रेम केवल उत्सवों में ही नहीं, बल्कि हमारे दैनिक जीवन में सेवा करने, उपचार देने और उनके दिखाए मार्ग पर चलने की दिशाओं में भी प्रकट होता है।भगवान श्री सत्य साईं बाबा का शताब्दी वर्ष साई वाइब्रियोनिक्स के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक रहा है। जो कार्य स्वामी के प्रत्यक्ष आशीर्वाद से एक विनम्र उपचार पद्धति के रूप में प्रारंभ हुआ था, वह उनकी कृपा और विश्वभर के प्रैक्टिशनर्स की निस्वार्थ सेवा से निरंतर विस्तार, विश्वसनीयता और प्रभाव में बढ़ता गया है।
इस पावन वर्ष की एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि 25 नवंबर 2025 को भगवान के श्रीचरणों में तीन पुस्तकों का सफल समर्पण था, जो साई कुलवंत हॉल में संपन्न हुआ। इसका विस्तृत विवरण ‘अतिरिक्त’ अनुभाग में साझा किए गए हैं। इस कार्य को समय पर पूर्ण करने में सहयोग देने वाले प्रत्येक प्रैक्टिशनर, समन्वयक, संपादक और स्वयंसेवक के प्रति हम हृदय से कृतज्ञ हैं। विशेष रूप से हम केंद्रीय ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी श्री आर.जे. रत्नाकर जी तथा अखिल भारतीय अध्यक्ष श्री निमिष पांड्या जी के प्रति अपनी हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने क्रमशः असाधारण अनुभव और केस हिस्ट्रीज़ पुस्तकों के लिए प्रेरणात्मक भूमिका लिखी। जो प्रैक्टिशनर पुस्तकें प्राप्त करना चाहते हैं, वे a[email protected] पर लिख सकते हैं।
वर्ष 2025 के दौरान वाइब्रियोनिक्स की गतिविधियाँ विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर विस्तृत होती रहीं। सैकड़ों प्रैक्टिशनर्स रोगी सेवा में सक्रिय रूप से संलग्न रहे, जबकि वेलनेस कैंप और क्लीनिकों की संख्या तथा पहुंच दोनों में वृद्धि हुई — जिसका स्पष्ट प्रतिबिंब 100 कैंप और क्लीनिक पुस्तक में देखा जा सकता है। प्रैक्टिशनर्स से अनुरोध है कि पुस्तक के प्रकाशन के पश्चात आयोजित कैंपों और क्लीनिकों के अद्यतन रोगी आंकड़े तथा नवीनतम तस्वीरें अवश्य साझा करें।
संगठनात्मक स्तर पर, पुट्टपर्थी स्थित साई वाइब्रियोनिक्स इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SVIRT) को खोलने और व्यवस्थित करने हेतु लगातार प्रयास किए गए। प्रशासनिक दल ने साधकों के डेटाबेस को अपडेट करने, सांख्यिकी पंजीकरण पूर्ण करने तथा विशिष्टताओं को अधिक स्पष्ट बनाने पर ध्यान केंद्रित किया। इस स्तरीय प्रक्रिया के अंतर्गत SRHVP मशीनों और 108CC बॉक्स के लिए एक क्रमांक प्रणाली आरंभ की गई है, जिससे मानकीकरण और दीर्घकालीन निगरानी सुनिश्चित हो सके। 2 दिसंबर 2025 को प्रशांति निलयम में आयोजित वार्षिक आम सभा (AGM) में वर्ष की प्रगति की समीक्षा की गई तथा आगामी वर्ष के लिए स्पष्ट दिशा प्रदान करने वाले कई प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए।
इस अंक से हम प्रैक्टिशनर्स कॉर्नर नामक एक नए अनुभाग का शुभारंभ कर रहे हैं, जो पूर्व के प्रैक्टिशनर प्रोफाइल का स्थान लेगा। यह अनुभाग साझा अध्ययन और प्रेरणा का मंच होगा। इसमें साधक अपने वाइब्रियोनिक्स के साथ जुड़ने की यात्रा, दिशानिर्देशों से प्राप्त प्रेरणा, मार्गदर्शन में संभाले गए जटिल प्रकरण, प्रभावी रूप से तैयार और प्रयुक्त नवीनी उपचार, तथा ऐसे विशेष अनुभव साझा कर सकते हैं जहाँ वाइब्रियोनिक्स ने अप्रत्याशित या गहन परिणाम प्रदान किए हों।
26 जनवरी को वाइब्रियोनिक्स दिवस के रूप में निर्धारित किया गया है, जो सामूहिक पहल, सेवा और निस्वार्थ उपचार की भावना का प्रतीक है। सभी साधकों से अनुरोध है कि वे इस दिन को सार्थक रूप से मनाएँ — शिविर आयोजित करके, रोगी मिलन कार्यक्रम करके, स्थानीय स्तर पर अनुभव साझा करके, साई समितियों या सामुदायिक केंद्रों में जागरूकता व्याख्यान देकर, अथवा इच्छुक साधकों को प्रशिक्षण के लिए प्रेरित करके। इस दिन की गतिविधियों की रिपोर्ट और छायाचित्र [email protected] पर भेजे जा सकते हैं, ताकि उन्हें आगामी अंकों में साझा किया जा सके।
भक्ति के नौ मार्ग — श्रवणम् (सुनना), कीर्तनम् (गाना), विष्णुस्मरणम् (चिंतन), पदसेवनम् (श्रीचरणों की सेवा), वंदनम् (नमन), अर्चनम् (पूजा), दास्यम् (सेवक भाव), स्नेहम् (मित्रता) और आत्मनिवेदनम् (पूर्ण समर्पण) — सभी पवित्र हैं; किंतु स्वामी हमें स्मरण कराते हैं कि सेवा सर्वोपरि है। ईश्वर द्वारा दिया गया यह शरीर केवल जीवन-यापन के लिए नहीं, बल्कि दूसरों की सेवा के लिए है: “केवल सेवा के फल ही शाश्वत हैं… मानवता की सेवा से बढ़कर कुछ भी नहीं है। मनुष्य की सेवा ही भगवान की सेवा है। सभी महान व्यक्तियों ने मानवता की सेवा करके ही अपने जीवन को पवित्र बनाया है। इसलिए कम से कम अब से मानवता की सेवा आरंभ करें। सेवा भजन और अन्य सभी साधनाओं से भी अधिक महत्वपूर्ण है।” ).”…Sri Sathya Sai Speaks, Vol 37, 1 Jan 2004, https://sssbpt.info/ssspeaks/volume37/sss37-01.pdf
शताब्दी वर्ष ने यह सिद्ध कर दिया है कि सामूहिक संकल्प, अनुशासन और भक्ति से कितना कुछ संभव है। आइए, हम इस गति और प्रेरणा को आगे बढ़ाएँ — शिविरों का विस्तार करें, अभ्यास को गहरा करें, उदारतापूर्वक मार्गदर्शन दें और ईमानदारी से प्रशिक्षण करें — ताकि वाइब्रियोनिक्स स्वामी के उपचारमय प्रेम का एक विनम्र माध्यम बना रहे।
आप और आपके प्रियजनों को स्वस्थ, प्रसन्न और सेवा-परायण वर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएँ।
साई की प्रेममयी सेवा में,
डॉ. जीत के. अग्रवाल