साई व्हाइब्रियोनिक्स पत्रिका

" जब आप किसी हतोत्साहित, निराष या रोग ग्रस्त व्यक्ति को देखते हो, वहीं आपका सेवा क्षेत्र है " Sri Sathya Sai Baba
Hands Reaching Out

दिव्य चिकित्सक के दिव्य वचन

Vol 16 अंक 4
जुलाई/अगस्त 2025


"मेरी राय में, हर व्यक्ति की यह प्राथमिक ज़िम्मेदारी है कि वह अपने खान-पान और अन्य आदतों को नियंत्रित करके हृदय रोग का शिकार होने से बचे। रोकथाम इलाज से बेहतर है। अगर खान-पान की आदतों को ठीक से नियंत्रित और नियमित किया जाए, तो हृदय संबंधी बीमारियों की संभावना कम ही होगी।"

 …Sathya Sai Baba, Divine Discourse, “Food, the heart and the mind” 21 January 1994

 http://www.sssbpt.info/ssspeaks/volume27/sss27-03.pdf

"इसे अपने हृदय में अंकित कर लें... यह सूत्र कि "दूसरों की सेवा करना पुण्य है, दूसरों को नुकसान पहुँचाना या दूसरों को कष्ट पहुँचाते समय अप्रभावित और निष्क्रिय बने रहना पाप है।"             

…Sathya Sai Baba, “Mirror and comb” Divine Discourse, 26 June 1969

https://www.sssbpt.info/ssspeaks/volume09/sss09-12.pdf