दिव्य चिकित्सक के दिव्य वचन
Vol 17 अंक 2
मार्च-अप्रैल 2026
"मन को शुद्ध करने के लिए पहली शर्त है शुद्ध भोजन। लेकिन, हर समय और हर पहलू से ऐसी शुद्धता सुनिश्चित करना हमेशा संभव नहीं होता। इस कठिनाई को दूर करने का उपाय यह है कि भोजन को ईश्वर को अर्पित किया जाए और उसे ईश्वर का प्रसाद (प्रसादम) माना जाए। ऐसा करने से भोजन की समस्त अशुद्धियाँ दूर हो जाती हैं।"
…Sathya Sai Baba, Purity of the mind, Divine Discourse, 25 May 1990
https://saispeaks.sathyasai.org/discourse/purity-mind-role-senses
"सेवा के माध्यम से, आपको यह एहसास होता है कि सभी जीव दिव्यता के सागर की ही लहरें हैं। कोई भी अन्य आध्यात्मिक गतिविधि आपको सभी जीवित प्राणियों की 'एकता' के निरंतर चिंतन में नहीं ला सकती। आप दूसरों के दर्द को अपने दर्द की तरह महसूस करते हैं। हर किसी को स्वयं के रूप में देखना और स्वयं को हर किसी में देखना—यही सेवा-साधना का मूल तत्व है। यह आपको दूसरों के कष्टों के सामने विनम्र बना देता है। सेवा द्वारा मिलने वाले अवसरों से, कठोर से कठोर हृदय भी धीरे-धीरे मक्खन की तरह कोमल हो जाता है।"
…Sathya Sai Baba, Chap 18 No bumps no jumps, SSS Speaks vol 13, 1975-77, Seva dal Conference, 15 Nov 1975
https://saispeaks.sathyasai.org/discourse/no-bumps-no-jumps#