साई व्हाइब्रियोनिक्स पत्रिका

" जब आप किसी हतोत्साहित, निराष या रोग ग्रस्त व्यक्ति को देखते हो, वहीं आपका सेवा क्षेत्र है " Sri Sathya Sai Baba
Hands Reaching Out

दैवीय चिकित्सक के दिव्य शब्द

Vol 16 अंक 1
जनवरी/फरवरी 2025


“मनुष्य प्रकृति में उपलब्ध खाद्य पदार्थों को अपने स्वाद के अनुरूप बदलना चाहता है, जिससे उनमें निहित जीवन के सार का अंत हो जाता है। क्योंकि वह भोजन में उपलब्ध जीवन देने वाली शक्तियों का विनाश कर रहा है, वह तेजी से खुद को बीमारी के अधीन कर रहा है। इसलिए, यदि मनुष्य, फिर से, उनकी प्राकृतिक अवस्था में खाद्य पदार्थ खाने लगे तो वह निश्चित रूप से बीमारी के अधीन नहीं होगा।.”

     …Sathya Sai Speaks on Food, Divine Discourse 8 October 1983, Sathya Sai Newsletter, USA, Vol 8-4

       Source—Sathya Sai Baba speaks on food, Sri Sathya Sai Sadhana Trust publication, Dec 2016, p.55

"आप जो कुछ भी सेवा के रूप में करते हैं, जिसे भी आप कार्य की पेशकश करते हैं, विश्वास करें कि यह उस व्यक्ति में भगवान तक पहुंचता है: ईश्वरसर्व भूतनामम्। तो यह ईश्वर-पनम (भगवान को समर्पित) है।

 …Sathya Sai Speaks, Divine Discourse, No bumps, no jumps, 14 Nov 1975

 https://sssbpt.info/ssspeaks/volume13/sss13-18.pdf